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सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (Cervical Spondylosis)

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (Cervical Spondylosis)

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (Cervical Spondylosis) एक सामान्य रीढ़ की बीमारी है जो गर्दन के जोड़ों, डिस्क और हड्डियों में उम्र के साथ होने वाले बदलावों के कारण होती है। इसे आम भाषा में 'गर्दन की गठिया' या 'गर्दन का जाम होना' भी कहा जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ती है और 40 वर्ष की आयु के बाद अधिकतर लोगों को प्रभावित करती है।

मुख्य कारण

1. उम्र का बढ़ना: उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में घिसाव और कमजोरी आना सामान्य है।
2. डिस्क का सूखना या सिकुड़ना: रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद कुशन जैसी डिस्क समय के साथ सिकुड़ जाती है।
3. हड्डियों में बढ़ोतरी (Bone Spurs): रीढ़ की हड्डी की रगड़ से अतिरिक्त हड्डियाँ उग सकती हैं जो नसों को दबा सकती हैं।
4. गर्दन पर बार-बार दबाव: जैसे कंप्यूटर पर लंबे समय तक झुककर काम करना, गलत पॉस्चर, मोबाइल का अधिक प्रयोग आदि।
5. पुरानी चोट: गर्दन पर लगी पुरानी चोटें भी आगे चलकर स्पॉन्डिलोसिस का कारण बन सकती हैं।

लक्षण (Symptoms)

- गर्दन में दर्द और अकड़न
- सिरदर्द (खासकर सिर के पिछले हिस्से में)
- कंधे और बाजुओं में दर्द
- हाथों में झुनझुनी या सुन्नता
- गर्दन घुमाने में कठिनाई
- कुछ मामलों में संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना
- कमजोरी महसूस होना

कब डॉक्टर के पास जाएँ?0

- दर्द लंबे समय तक बना रहे
- हाथ या पैर में कमजोरी महसूस हो
- चलने या संतुलन बनाने में कठिनाई
- चक्कर आना

ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें

बचाव और सुझाव

- रोजाना हल्के व्यायाम और योग करें (विशेषकर गर्दन के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज)
- काम करते समय सही पोस्चर रखें
- मोबाइल और लैपटॉप का सही तरीका अपनाएं
- तकिया ज्यादा ऊँचा  ना लगाए

नोट: सही निदान और सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।